Friday, 10 September 2021

अन्य भाषा एक बहुवचन का दान है (हिंदी )

 आज का विषय

एक बार जरुर पढ़े


*अन्य भाषा एक बहुवचन का दान है*


*PLURAL GIFT*


👉वे अन्य भाषाओं में बातें करेगे!

(मरकुस 16:17)


✍️अब इसी को *King James Bible*


👉क्या कहती है original translation से और बहुत पूराना translation है!


👉 And these signs shall follow them that believe; In my name shall they cast out devils; *they shall speak with new tongues;*

(वे नई भाषाएं बोलेंगे)


👉जब वह शब्द सुनाई दिया, तो भीड़ लग गई और लोग घबरा गए, *क्योंकि हर एक को यही सुनाई देता था, कि ये मेरी ही भाषा में बोल रहे हैं।* और वे सब चकित और अचम्भित होकर कहने लगे, “देखो, ये जो बोल रहे हैं क्या सब गलीली नहीं? तो फिर क्यों हम में से; हर एक *अपनी-अपनी* जन्म-भूमि की भाषा सुनता है?”

(प्रेरितों के काम 2:6-8)

✍️पतरस अकेला नहीं था!


👉 *क्योंकि उन्होंने उन्हें भाँति-भाँति की भाषा बोलते और परमेश्वर की बड़ाई करते सुना।* 

(प्रेरितों के काम 10:46)


✍️एक भाषा नहीं,भाँति-भाँति की भाषा!


👉और जब पौलुस ने उन पर हाथ रखे, तो उन पर पवित्र आत्मा उतरा, *और वे भिन्न-भिन्न भाषा बोलने और भविष्यद्वाणी करने लगे।*

(प्रेरितों के काम 19:6) 

 

✍️मतलब:- एक व्यक्ति एक भाषा बोल रहा!


👉दूसरा उसके विपरित दूसरी भाषा बोल रहा था!


👉तीसरा अलग भाषा!  


👉total बारां भाषा!


👉वहां एक सो बीस भाषा, यहां बारां भाषा!


👉 *और किसी को अनेक प्रकार की भाषा;* 

(1 कुरिन्थियों 12:10)


👉और वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ्य दी, *वे अन्य-अन्य भाषा बोलने लगे।*

(प्रेरितों के काम 2:4)


✍️ *अनेक प्रकार की भाषा,और जो पब्लिक सून रही थी वो समझ रही थी!*


✍️आपको एक परमेश्वर का concept (सिध्दांत)समझ आ गया!

👉आपको पिता, पुत्र, पवित्र आत्मा का concept (सिध्दांत) समझ आ गया!


👉एक बपतिस्मा का concept (सिध्दांत) समझ आ गया, तो‌ ये कियू समझ पा रहे ऊपर कोई एक भाषा है ही नहीं!


(1 कुरि 14:5) PLURAL है!

(1 कुरि 14:6) PLURAL है!

(1 कुरि 14:18) PLURAL है!

(1 कुरि 14:22) PLURAL है!

(1 कुरि 14:23) PLURAL है!


👉इन सभी जगहों पर बहुवचन पढ़ने को मिलता है!


*ध्यान से सूने*:-


👉 *एक व्यक्ति को एक से ज्यादा भाषाओं मैं बालने का दान मिल सकता है!*


👉तो एक व्यक्ति एक ही भाषा में बात नहीं करता है!


👉अगर आप कहते हो मुझ से प्रभु ने बात किया प्रभु ने स्वर्गीय दान दिया!


👉तो मेरा ये प्रश्न है फिर तुम एक भाषा में बात कियू कर रहे हो फिर तो आपके पास बहुत सारी भाषा होनी चाहिए! 


👉मैं शब्दों की बात नहीं कर रहा ,मैं भाषा की बात कर रहा हूं!


👉 *क्योंकि लिखा है एक भाषा है ही नहीं थी, अनेक भाषा थी!*


👉आपने अभी जो सूना वो‌ बहुवचन है! 


👉फिर आप एक भाषा में कैसे बात कर रहे हो!


👉 *कम से कम बारां यहां एक सो‌ बीस वहां!*


👉मैं कहां से बोल रहा हूं बाईबल से!


👉 *मैं अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ, कि मैं तुम सबसे अधिक अन्य अन्य भाषा में बोलता हूँ।* 

(1 कुरिन्थियों 14:18-19)


✍️ *दस हजार शब्द!*


👉तो शब्द कब बनते हैं जब भाषा होती है!


👉भाषा से ही शब्द बनता है!


*उदाहरण*:-


👉मराठी में टमाटा!

👉हिंदी में टमाटर!

👉English में Tomato


👉एक ही सब्जी है! 


👉तीन शब्द क्यों?


👉क्योंकि:-तीन भाषाएं हैं!


👉तो पौलुस कहता है:- *मैं तुम सबसे अधिक अन्य अन्य भाषा में बोलता हूँ।* 


*ध्यान दें*:-


✍️ *क्या कहीं पढ़ने में आता है, जो अन्य भाषा जो दान है वो Singular (एकवचन) है ?*


👉नहीं आता!


👉 *अन्य भाषा का दान कभी Singular (एकवचन) नहीं था!*


👉पता नहीं कहां से निकाले हैं!


👉और जो बाईबल में से नहीं, उस मुर्खता की हम उसे स्वीकार कैसे कर सकते हैं!


👉वो चाहे Africa से आए!


👉चाहे America से आए!


👉चाहे favourite पापा से आए!


👉वो चाहे favourite Pastor से आए!


👉चाहे कहीं से भी आए!


*ध्यान से सूने*:-


✍️तो प्रश्न उठता है!


👉 *तो आप check करो आप क्या बोल रहे थे Glossa या Gibberish* 


👉अगर आप  Glossa की बात करते हैं तो वो‌ PLURAL (बहुवचन) है!


👉अगर Gibberish की बात करते हैं तो‌ वो भी PLURAL (बहुवचन) होना चाहिए आपके हिसाब से मेरे हिसाब से तो नहीं!


👉तो वो एक कैसे हो गया!


👉एक व्यक्ति एक ही भाषा में कैसे बात कर रहा है!


👉आप कहता है Gibberish प्रभु की ओर से है!


👉फिर एक ही भाषा में कियू बात कर रहे हो!


👉आपकी बहुत सारी भाषाओं बात करना चाहिए!


*ध्यान से सूने*:-


✍️आप struggle (संघर्ष) एक को पकड़ने के लिए, आपको जो सिखातें है ना ये repeat करो!


👉उसको सिखने में हालत ख़राब हो जाता है!


👉फिर इतनी भाषा में कैसे बात करोगे!


👉क्योंकि ये तो PLURAL (बहुवचन) है!


*God bless you*

Saturday, 4 September 2021

Lockdown में आपको सबसे ज्यादा किसने संभाला

 Lockdown में आपको सबसे ज्यादा आत्मिक तौर पर किसने संभाला ?


1) आप जब घर पे थे , 

2) कही जा नही सकते थे ,

3) हालत खराब है

4) ऐसी  परीस्थिती में आपको किसने संभाला है ?


तो दो चीजो ने सांभाला


1) एक प्रभू का वचन और

2) दुसरा प्रार्थना 


ये दो चिजो ने ज्यादा संभाला है । 


1) आप संभाले है ,

2) मैं संभाला हु 

3) पुरी भारत में जितने भी मसियत है उनको ये दो चीजा नें संभाले है 

4) विशेष करके कोरोना व्हायरस के और Lockdown के दरम्यान मैं जो परिस्तिथी चारो तर्फ बिघडी हुवी है , 

5) उसमे ये दोनो चिजो ने आपको संभाला है ।


Lack daun में आप ये सिखे होंगे कि ,,

1) परमेश्वर हि सबकूच है । 

2) परमेश्वर के शिवाय कुछ नहीं है। 

3) सच्चा सहारा परमेश्वर  है ।


 ये दो चिजो से एक प्रभू का वचन और दुसरा  वचन से आप सिख गये होंगे ।


पूरी दुनिया में जो मुझे दिखने में आया :-  


1) वो चाहे सेवक हो ,  विश्वासी हो , दास वा दासी हो , 

2) अमीर हो या गरीब हो , छोटा हो या बडा , भाई बहन हो

 

इन दोनो को  ऐसे लोगो को ये दो चिजो ने बचाया है । 

एक है वचन और

 दूसरा है प्रार्थना


क्या-क्या काम नहीं आया  इस Lochdoun में ? 


जब आप अकेले थे प्रभू के साथ मैं , आप जीसके पीछे भाग रहे थे वो भी काम नाही आया । 


  कौन-कौन सीं चिजे ठीक नहीं लगी । 

 Lockdaun ने इस परिस्थिती ने सिखा दिया कि  

1) वचन ही सबकुछ है, प्रार्थना ही सबकुछ है , येशू के पास आना सबकुछ है ।

2) आप दुसरो को महत्व देते थे , लेकींन lockdoun ने आपको सिखा दिया कि महत्व दो चिजो को देना है

 1) प्रभू का वचन

 2) और प्रार्थना


क्या-क्या काम नहीं आया इस lockdoun में ?


1) ना किसी का मसिह गीत काम आया

2) ना किसी का Music काम आया

3) ना किसी का अभिषेक तेल काम आया

4) ना किसी का online Preyer काम आया 

5) ना किसी कौसलिंग काम

6) किसी का प्रोफसी काम आया

7) ना किसी का ऑफरींग काम आया

8) ना किसी का मोटीवेशनल प्रीचींग काम आया

9) ना कोई local pastor काम आया


    क्योंकी आप सबसे जादा उसपे निर्भय थे , पास्टर प्रार्थना करेगा , पास्टर सिखाएगा तब सबकुछ ठीक हो जायेगा लेकिन वो भी काम नही आया वो भी चूट गया ।

10) ना कोई दुनियादारी काम आई ।


1) क्योंकी यहाँ हर तरह के डॉक्टर हो , राजनैतिक हो , पूरी दुनियाने अपने हाथ उठा लिया 

2) इस करोना व्हायरस के सामने ,  घुटने टेक दिए 

3) और कहा आपको खुद खयाल रखना है।

 

दोस्तो , 

Lockdoun ने हम को हर चीज समझादी है । 

1) कौन अपना है , 

2) कौन पराया , 

3) कौन सही हैं

4) और कौन गलत है ।


 प्रेरितो के काम 6:4

परंतु हम तो प्रार्थना और वचन की सेवा में रहेंगे ।


1) हमे सबसे बडा सहारा है प्रभू का वचन और प्रार्थना 

2) आप खुद वचन जादा स्टडी करेंगे तो परमेश्वर संभालेंगा 

3) हम खुद कितना प्रार्थना में बैठे होंगे प्रभु के संगत में , 

4) तो प्रभू आपको संभालेंगा ।


वचन आपका सहारा बनेगा 

प्रार्थना आपका सहारा बनेगा ।

Friday, 3 September 2021

फक्त देवाच्या कृपेमुळे

💝मनुष्याने विसरून जावे असे त्याच्यात कांहींसुद्धा नाही.💝


प्रभो मनुष्य म्हणजे असा कोण आहे की तुझे त्याच्याकडे लक्ष असावे.?किंवा मनुष्याची संतती तरी काय की तू तिला दर्शन द्यावेस.मनुष्याने अशी कोणती योग्यता संपादिली आहे की तीमुळे तू त्याजवर कृपा करावीस.?.

 *निष्कर्ष:-माझे आज जे काही अस्तित्व आहे,ते फक्त देवाच्या कृपेमुळे आहे.* 


प्रभू तू मला विसरलास तरी मला कुरकुर करायला कोठे जागा आहे.?आणि तू माझी विनंती ऐकली नाहीस तरी मला काय म्हणता येण्यासारखे आहे.?हे मात्र खरोखर माझ्या मनात येईल,आणि मला म्हणता येईल की "हे प्रभो मी कोणी नाही मला करिता येत नाही मजमध्ये चांगले असे काही नाही.उलट मी प्रत्येक बाबतीत उणा आहे आणि माझी प्रवृत्ती निरंतर अशी आहे की मी काही नाही."

 *निष्कर्ष:-मी एक मनुष्य म्हणून शून्य आहे.पण ख्रिस्तात त्याच्या सहवारीस.* 


तू मला उचलून धरिले नाहीस आणि मला आतून शिक्षण दिले नाहीस तर मी सर्वथा निस्तेज होत जातो आणि शेवटी थंड पडतो.

 *निष्कर्ष:-पवित्रशास्त्राचे ज्ञान आणि मार्गदर्शन हेच माझ्या आत्मिक जीवनाचे रहस्य आणि बळ आहे त्याशिवाय मी काहीच नाही.* 


पण मी व्यर्थ असून तुझ्यापुढे कांहींच नाही,मी एक अस्थिर आणि अशक्त मनुष्य आहे.खरोखर रिकाम्या फुशारक्या हा एक दृष्ट व्याधीच आहे.अत्यंत मोठी व्यर्थता ती हीच; कारण ही खऱ्या वैभवापासून दूर ओढणारी  असून आमच्या दैवी शांतीचा विध्वंस करणारी आहे.कारण मनुष्य स्वतःकडे पाहून खुष होणारा असला म्हणजे तो तुला नाखूष करणारा असतो.त्याला मनुष्याची स्तुतीची तहान लागू लागली की तो खऱ्या सद्गुणांना मुकून बसतो.


Sunday, 15 August 2021

देवाची वधू



                        *🌟प्रभात तारा🌟*


                         *✨देवाची वधू✨*


 *"मी तुला सर्वकाळची आपली वाग्दत्त असे करीन, धर्माने व न्यायाने, व ममतेने व दयेने मी तुला आपली वाग्दत्त असे करीन."..✍🏼*

                       *( होशेय २:१९ )*


                             *...मनन...*


             *!!..परमेश्वराची स्तुती असो..!!* 


     इस्राएलबरोबर असलेले स्वतःचे नाते स्पष्ट करण्यासाठी देवाने वारंवार विवाह, वधू, वर या प्रतीकांचा उपयोग केलेला आपणांस पाहावयास मिळतो. जसे की, *...नवरा जसा नवरी पाहून हर्षतो तसा तुझा देव तुला पाहून हर्षेल. ( यशया ६२:५)* त्याचप्रमाणे यिर्मयामध्ये परमेश्वर म्हणत आहे की, *... मी लग्नाचा नवरा आहे. ( यिर्मया ३:१४)* आणखी आपण पाहातो की, गीतरत्नमध्ये देखील देव आणि त्याची मंडळी म्हणजे त्याची वधू यांच्यातील प्रीतीविषयी लिहिले आहे. इस्राएल देवाची वधू आहे. देव इस्राएलविषयी म्हणतो की, *मी तुला सर्वकाळची आपली वाग्दत्त असे करीन.* देव आपल्या वधूशी, यहूदी लोकांशी निष्ठेने वागला. त्यांने त्यांच्यावर प्रीति केली, त्यांचे रक्षण केले आणि सर्व प्रकारच्या बहुमोल देणग्या देऊन त्यांना आशीर्वादित केले. परंतु त्यांनी मात्र देवाला सोडून दिले. ते अन्य दैवतांच्या नादी लागले. त्यांनी देवाचे नियम पाळले नाहीत. होशेयच्या पत्नीप्रमाणे त्यांनी आपल्या विवाहाची वचने मोडली. परिणामी ते गुलामगिरीत, पापाच्या दास्यात खितपत पडले. सगळीकडे त्यांची निंदा झाल्यामुळे शरमेने त्यांची मुखे काळवंडून गेली. गोमरप्रमाणे इस्राएल लोकही देवाने त्यांना पूर्वी विपूल प्रमाणात दिलेले आशीर्वाद विसरून गेले. 

     होशेयचा विवाह अविश्वासू वधूशी, गोमरशी झाला होता. तसेच देवानेही अविश्वासू इस्राएलशी लग्न केले आहे. होशेय प्रमाणेच देवाच्याही हृदयात इस्राएल विषयी अपार प्रीति आहे. बहकलेल्या इस्राएलने आपल्याकडे परत यावे अशी देवाला किती उत्कंठा लागलेली असते हे होशेयच्या उदाहरणावरून आम्हाला दिसून येते. होशेयचे नाव, लौकिक, प्रीति हे सारे एका निर्लज्ज, व्यभिचारी स्त्रीच्या पायी मातीमोल झाले, त्या स्त्रीसाठी होशेयच्या सर्वस्वाचा होम झाला. आमच्या प्रभू येशूनेदेखील आमच्यासाठी असेच केले नाही का ? आम्ही पापात खितपत पडलेले असतानाच तो आमच्याकडे आला. एवढेच नाही तर आमच्या पापांची क्षमा केली, त्यासाठी त्याने कालवरीवर वधस्तंभावरचे लज्जास्पद मरणही पत्करले. *त्याने स्वतःला आपल्याकरिता दिले, ह्यासाठी की, 'त्याने खंडणी भरून' 'आपल्याला सर्व स्वैराचारापासून मुक्त करावे', आणि चांगल्या कामात तत्पर असे आपले 'स्वतःचे लोक आपणासाठी शुद्ध करून ठेवावे'. ( तीत २:१४)*

      प्रख्यात मनोविकारतज्ञ कार्ल मेनिंजर यांनी आपल्या "Whatever became of sin ?"  या पुस्तकात "पाप म्हणजे दूसऱ्यांची प्रीति नाकारणे", अशी पापाची अगदी सखोल व मनाला भिडणारी व्याख्या केली आहे. खरोखरच *" पाप म्हणजे देवाची आमच्यावरील प्रीति नाकारणे"* हेच खरे आणि वास्तव आहे. दाविद राजा आपल्या पापांचा अंगीकार करताना म्हणतो की, *"तुझ्याविरूद्ध, तुझ्याविरूद्धच मी पाप केले आहे, तुझ्या दृष्टीने जे वाईट ते मी केले आहे." ( स्तोत्र ५१:४)* होशेयद्वारे कशानेही पराभूत न होणारी खऱ्या पतीची खरी प्रीति येथे दाखवली आहे व देवानेही स्वतःला खरा पती असे दाखवले आहे. त्याचबरोबर इस्राएलची बंडखोरी, सातत्याने होणारी धर्मभ्रष्टता येथे दाखवली आहे. होय प्रियांनो, आम्ही देवाची वधू आहोत. आमचा वर स्वतः प्रभू आहे. तो आमची काळजी घेतो आमच्यावर प्रीति करतो. आम्ही इस्राएल लोकांप्रमाणे किंवा गोमरप्रमाणे देवाबरोबर बंड करू नये, अन्य दैवतांच्या मागे जाऊ नये तर देवाबरोबर एकनिष्ठ राहावे. त्याच्यावर प्रीति करावी.


         


     

Thursday, 5 August 2021

ख्रिस्ताला ओळखा

 *पिता परमेश्वर, पुत्र प्रभू येशू ख्रिस्त आणि पवित्र आत्मा ह्यांना धन्यवाद असो..!!*


                     


                *✨ख्रिस्ताला ओळखा✨*


*"प्रभूजी, आम्ही कोणाकडे जाणार? सार्वकालिक जीवनाची वचने आपणाजवळ आहेत; आणि आम्ही विश्वास ठेवला आहे आणि ओळखले आहे की, देवाचा पवित्र तो पुरुष आपण आहात."..✍️*

                     *( योहान ६:६८,६९)*


                


           


    आजच्या शुभवर्तमानात आपण वाचतो की, पुष्कळ शिष्य येशूला सोडून निघून गेले आहेत. यावरून येशूच्या सान्निध्यात राहूनही अद्याप बरेच दूर असलेल्या 'काठावरील' तथाकथित शिष्यांचा बोध होतो. ते खरे विश्वासणारे नव्हते. कारण ख्रिस्ताचे शिक्षण, वचन स्वीकारणे त्यांना कठीण वाटत होते. मांस व देह खाणे, तसेच मनुष्याच्या पुत्राचे स्वर्गात चढून जाणे आणि त्यापूर्वी त्याला दुःख भोगून मरण सोसावे लागणे या शब्दांनी त्यांचा गोंधळ उडाला आणि ते अडखळले. प्रभू त्यांना म्हणत आहे, *"आत्मा हा जिवंत करणारा आहे, देहापासून काही लाभ नाही; मी जी वचने तुम्हाला सांगितली आहेत ती आत्मा व जीवन अशी आहेत." ( वचन ६३)* या वचनाचा रोख त्यांचे विचार ऐहिकतेपासून आध्यात्मिकतेकडे वळवावे असाच आहे. आपल्या शिक्षणातील आध्यात्मिक अर्थ नीट समजून घेण्याच्या गरजेकडे त्याने त्यांचे लक्ष वेधले. त्यांच्यापैकी काही जणांच्यामध्ये विश्वासाचा अभाव आहे हे येशूला माहीत होते. 

    प्रभू येशू तेथे अजूनही त्याच्यासोबत  असलेल्या त्याच्या बारा शिष्यांना विचारतो की, *"तुमचीही जाण्याची इच्छा आहे काय?"* तेव्हा शिमोन पेत्र म्हणत आहे की, *"आम्ही कोणाकडे जाणार?...  आम्ही विश्वास ठेवला आहे आणि ओळखले आहे की देवाचा पवित्र तो पुरुष आपणच आहात."* ह्या त्याच्या उद्गारात पेत्राने तीन गोष्टी प्रभू विषयी खात्री देणाऱ्या बोलल्या आहेत. 

   पहिली गोष्ट म्हणजे, तो म्हणत आहे की, प्रभू येशू शिवाय आम्ही कोणाकडे जाणार? पेत्र व इतर शिष्य येशूबरोबर बराच काळ राहिले होते. त्यांनी प्रभू येशूची प्रेमाची, दयेची, क्षमेची शिकवण ऐकली होती. त्यांनी प्रभूने केलेले चमत्कार पाहिले होते. त्यांनी प्रभूचा उदात्त व थोर स्वभाव जाणून घेतला होता. तसेच त्यांनी प्रभू येशूचे मानवी, आध्यात्मिक व सामाजिक जीवन अगदी जवळून पाहिले होते. म्हणूनच पेत्र म्हणत आहे, *"प्रभू आम्ही कोणाकडे जाणार? "* प्रभू येशू हाच "मार्ग, सत्य व जीवन आहे." आणि तोच आम्हाला विसावा देणारा आहे. तो प्रेमाने आम्हाला आमंत्रित करतो, *"अहो, कष्टी आणि भाराक्रांत जनहो, तुम्ही मजकडे या; मी तुम्हांला विसावा देईन."*

     दूसरे म्हणजे पेत्र म्हणत आहे, *"सार्वकालिक जीवनाची वचने प्रभू येशू जवळ आहेत."* पेत्राच्या या उद्गारातून आपल्या लक्षात येते की, बायबल मध्ये सार्वकालिक जीवन प्राप्त करण्यासाठी अर्थपूर्ण वचने आहेत. वचनाद्वारे आपले जीवन परिवर्तन होऊ शकते. आपले जीवन बदलून टाकण्याची शक्ती प्रभू येशूच्या शब्दामध्ये आहे. प्रभू म्हणतो, *"जो माझा देह खातो व माझे रक्त पितो, त्याला सार्वकालिक जीवन प्राप्त झाले आहे. आणि मीच त्याला शेवटल्या दिवशी उठवीन." ( योहान ६:५४)* आपणही प्रभू येशू द्वारे मिळणाऱ्या सार्वकालिक जीवन प्राप्तीसाठी त्याच्या अधिक जवळ येऊया. 

    तिसरी गोष्ट म्हणजे, पेत्र म्हणत आहे, *"देवाचा पवित्र पुरुष प्रभू येशू ख्रिस्त आहे."* येशू कोणीतरी खास, विशेष आहे. तो देवाचा पवित्र तो पुरुष आहे. तो असा आहे ही खात्रीच शिष्यांच्या विश्वासाचे केंद्रस्थान होती. पेत्राने प्रभूविषयी कबूली दिली आहे. त्याने ख्रिस्ताचे देवत्व, प्रभूत्व ओळखले आहे. त्याने येशूच्या स्पर्शामध्ये देवाचा स्पर्श जाणून घेतला आहे. त्याने प्रभू येशू मध्ये अनंतकालीन जीवनाचे ओझरते दर्शन घेतले होते. त्याला प्रभूच्या थोरवीची व पावित्र्याची जाणीव झाली होती. म्हणूनच तो प्रभूला "देवाचा पवित्र पुरुष" असे घोषित करतो. 

    प्रिय देवाच्या लेकरांनो, पेत्राप्रमाणे आपणही प्रभूला ओळखूया. आपणही प्रभू येशू मधील पावित्र्याची जाणीव करून घेऊया. आणि त्याच्या अधिक जवळ येऊन त्याला जाणून घेऊया. तो किती चांगला आहे, ह्याचा अनुभव घेऊन पाहूया. ( स्तोत्र ३४:८) 


         

Wednesday, 19 May 2021

मागे नाही तर पुढे पहा.

 *उत्पत्ति १९ : २३-२८ आणि   लूक  १७ : २८-३३.*


        *मागे नाही तर पुढे पहा.*


    *जो कोणी आपला जीव सांभाळण्याचा प्रयत्न करील  तो आपल्या जीवाला मुकेल , आणि जो कोणी आपल्या जीवाला मुकेल तो आपला जीव वाचविल*. 

               *लूक १७:३३*


       *प्रभू येशू स्वतः म्हणत आहे  , " लोटाच्या बायकोची आठवण करा .*   लोटाची बायको म्हटलं की मला रुथची सुद्धा आठवण येते . कारण या दोघीही लोटाशी संबंध असणाऱ्या स्त्रिया आहेत. एक *लोटाची पत्नी* ,  तर दुसरी म्हणजे लोटाला  जो मवाब नावाचा मुलगा त्याच्या स्वतःच्या मुलीपासून झाला होता त्याच्या म्हणजे मवाबी  वंशातील *रूथ* नावाची स्त्री आहे. एकीने म्हणजे लोटाच्या पत्नीने मागे वळून पाहिले आणि मोठा अनर्थाला सामोरे जावे लागले. तर एकीने म्हणजे रुथने पुढेच दृष्टी ठेवली  म्हणून  मोठे प्रतिफळ व मोठा मानसन्मान  तिला मिळाला.

      सदोम गमोरा सोडताना देवदूताने लोटाला सांगितले होते की मागे वळून पाहू नका . तरीही लोटाच्या पत्नीने मागे वळून पाहिले आणि ती मिठाचा खांब झाली. पण एवढ्यावरच अनर्थ थांबला नाही तर लोटाच्या मुली आणि लोट यांच्याकडून महापातक घडले. नीतिमान लोटाच्या वंशात अनितीमान , दुष्ट , व्यसनाधीन , मूर्तीला  मुलाचा बळीअर्पण करणारा असा मवाबी वंश तयार झाला. *मागे वळून पाहण्याने किती भयानक नाश ओढवतो हे विसरू नका.* 

     मागे वळून पाहणे म्हणजे पुन्हा सदोम व गमोरासारख्या  पातकात पडणे.  मागे वळून पाहणे हे फार धोक्याचे आहे. संकटांची मालिका आणि देवापासून दुरावा हेच काय ते हाती येते .  पण याच वंशातील रुथने मात्र जेव्हा नामीच्या प्रीतीपूर्ण वागण्याने जिवंत देवाला जाणले तेव्हा मात्र रुथने  आपली दृष्टी पुढे म्हणजे ह्या जिवंत देवावर , परमेश्वरावर स्थिर केली आणि अतिशय महान प्रतिफळाची , आशीर्वादाची मानकरी ठरली. मत्तयाच्या पहिल्या अध्यायात प्रभू येशूच्या वंशावळीत तीचं नाव आहे. कारण ती म्हणते नामीला जी  नामी जिवंत देवावर विश्वास ठेवणारी होती की , " तुझा देव तोच माझा देव.

      प्रभूने आम्हालाही त्या पापाच्या , सदोम, गमोराच्या दलदलीतून बाहेर काढलं आहेच.  आता मागे वळून पाहणे नाही तर फक्त त्या ख्रिस्तावर दृष्टी ठेवून चालत प्रतिफळ मिळवायचं आहे ..

     कारण मागे वळून पाहण्यात शाप आहेत तर पुढे ख्रिस्ताकडे पाहण्यात आशीर्वाद आहेत. मागे पाहण्यात न्याय तर पुढे पाहण्यात कृपा आहे. मागे पाहण्यात लोट आहे तर पुढे पाहण्यात ख्रिस्त आहे.

   *आमचा भूतकाळ कितीही वाईट असला तरी आता आम्हाला ख्रिस्त सापडला आहे . रूथप्रमाणे पूर्ण जिवाने , पूर्ण शक्तीने , पूर्ण बुद्धीने सर्वस्व अर्पण करीत ख्रिस्तावर प्रीति करीत   येशू ख्रिस्तावरच दृष्टी ठेवू.* *मागे नाही तर पुढे ख्रिस्ताकडे पाहू!!*

 

     

Thursday, 8 April 2021

सर्व काही आहे , "पण "

 *२ राजे ५:१-४*


     *सर्व काही आहे , "पण " !*


     *तू आपला देव परमेश्वर ह्याचे वचन मनापासून ऐकशील आणि त्याच्या दृष्टीने जे नीट ते करशील , त्याच्या आज्ञांकडे कान देशील आणि त्याचे सर्व विधी पाळशील तर मिसरी लोकांवर जे रोग मी पाठवले त्यापैकी एकही तुझ्यावर पाठवणार नाही ; कारण मी तुला रोगमुक्त करणारा परमेश्वर आहे.*

       *निर्गम १५:२६*.


    आमच्या जीवनात हा *पण* जो आहे तो नेहमीच डोकावत असतो. ह्या *पण* मुळे सर्वकाही असुनही नसल्यासारखेच असते.

हा नामान सेनापती होता , आपल्या धन्याच्या पदरी थोर मनुष्य होता , त्याच्या हाती अधिकार , सामर्थ्य होते , राजाच्या मर्जीतील तो होता. युद्धात विजय मिळविणारा पराक्रमी वीर तो होता.  *पण* तो कोडी होता.  जक्कय  हा सुद्धा फार श्रीमंत होता, मुख्य जकातदार होता , येशूला पाहावे ही इच्छा त्याची होतीच , *पण* तो बुटका होता म्हणून प्रभूला पाहू शकत नव्हता. 

     हा *पण* काय दाखवतो तर आमच्यात काहीतरी उणेपणा आहे की ज्यामुळे आम्ही खऱ्या व जिवंत देवापासून दूर आहोत. नामान कोडी होता ,कोड हे पापाचे दर्शक आहे. त्यामुळे सर्व असूनही तो खऱ्या आणि जिवंत देवापासून दूर होता. जक्कयात पातकाच बुटकेपण होत म्हणून ख्रिस्ताला तो पाहू शकत नव्हता. *ह्या ख्रिस्तापासून दूर असणं म्हणजे  पातकात असणं म्हणजेच सार्वकालिक मृत्यूकडे वाटचाल!!  हा पातकाचाच *पण* आमच्यात आहे. *पापाचा हा रोग जो आहे तो संसर्गजन्य आहे. *रोम ५:१२ सांगते, एक माणसामुळे पाप जगात शिरले आणि पापाच्या द्वारे मरण शिरले आणि सर्वांनी पाप केल्यामुळे सर्व माणसामध्ये अशा प्रकारे मरण पसरले.*  

     *पण यावर उपाय आहे. तो म्हणजे ख्रिस्ताला शरण जाणे.* सर्व पापाची कबुली देत पश्चाताप करीत प्रभू येशूचा तारणारा म्हणून स्वीकार करणं !! नामानाला इस्राएलच्या जिवंत देवावर विश्वास ठेवणारी छोटी मुलगी भेटली, जक्कयाच्या सुध्दा कानावर प्रभू येशूची सुवार्ता आलीच होती म्हणून तो ख्रिस्ताला पाहण्यासाठी बुटकेपणावर मात करीत धडपडला. आणि त्यांच्या जीवनातील हा *पण* दूर झाला. खऱ्या जीवनात त्यांचा प्रवेश झाला. *पातकाचा रोग नाहीसा झाला.* 

     आमच्या जीवनात जर हा  *पण* असेल जो प्रभूपासून आम्हाला दूर ठेवतो तो आजच काढून टाकू कारण आता आम्हाला ख्रिस्त सापडला आहे ,समजला आहे , तर का आम्ही सर्व असूनही ह्या *पण* मूळे काहीच नसल्यासारखे जीवन जगावे? *कारण जर ख्रिस्त जीवनात प्रथमस्थानी नाही तर जीवनात काहीच नाही.*

    *सर्व समर्थ ईश्वरा आमच्यातील सर्व उणेपणा जो पातकामुळे आहे तो काढून आम्हाला शुद्ध आणि पवित्र कर म्हणजे आम्ही तुझ्या सहवासात सदैव राहू*. 

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